महिलाओं सम्बन्धी समस्याओं के बारे में जानकारी

मासिक धर्म क्या है?

• महिलाओं के शरीर में चक्रीय हार्माेन्स में होने वाले बदलावों की वजह से गर्भाशय से नियमित तौर पर खून और अंदरुनी हिस्से से श्राव होना मासिक धर्म (माहवारी) कहलाता है।
• व्यस्क होने पर प्रत्येक चक्र के दौरान अण्डाशय में केवल एक ही अण्डा परिपक्व होता है और गर्भाशय में छोड़ा जाता है (जिसे अण्डोेत्सर्ग कहते हैं)
• उसी समय, गर्भावस्था की तैयारी में गर्भाशय का भीतरी हिस्सा मोटा होना शुरू हो जाता है। यदि यह अण्डाणु निषेचित नहीं होता, तो यह गर्भाशय के भीतरी हिस्से के अतिरिक्त ऊतकों के साथ माहवारी (खून) के रूप में योनि से निकलना शुरू हो जाता है। इसके बाद अगला माहवारी चक्र फिर से शुरू हो जाता है।

लड़की को किस उम्र में माहवारी शुरू हो जाती है? माहवारी किस उम्र में बंद हो जाती है?

• अधिकतर लड़कियों को 11-12 वर्ष की आयु में माहवारी आनी शुरू हो जाती है। अधिकतर महिलाओं की प्राकृतिक रजोनिवृत्ति 45-55 वर्ष की आयु में हो जाती है। इस आयु में, माहवारी आना हमेशा के लिए बंद हो जाती है, और इसके बाद महिलाएं बच्चे पैदा करने में सक्षम नहीं रहती हैं।

क्या मुझे प्रत्येक महीने माहवारी अवश्य आनी चाहिए?

• जी नहीं, सभी महिलाओं को प्रत्येक महीने माहवारी नहीं आती। किसी महिला का चक्र उसकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है व एक माहवारी चक्र 21 से 35 दिनों का हो सकता है। चक्र की अवधि से तात्पर्य यह है कि माहवारी आने के पहले दिन से लेकर अगली माहवारी आने के पहले दिन तक की अवधि।
उदाहरण के लिएः
पिछली माहवारी का पहला दिनः 1 अक्टूबर

मौजूदा माहवारी का पहला दिनः 29 अक्टूूबर

चक्र की अवधिः 28 दिन

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यौन रूप से सक्रिय किसी भी महिला में गर्भधारण की संभावना रहती है।
• जिन लड़कियों की महावारी हाल ही में शुरू हुई और जो महिलाएं रजोनिवृत्ति की आयु पर पहँुचने वाली हैं, उनको अनियमित माहवारी आ सकती है
कुछ परिस्थितियों को हार्मोन्स के असंतुलन से जोड़ा जा सकता है, जिनकी वजह से माहवारी अनियमित हो सकती है। वे यह हैंः
❇️ वजन सामान्य से अधिक अथवा कम होना। ❇️ खान-पान सम्बन्धी विकार होना।
❇️ बहुत अधिक कसरत करना व तनाव होना। ❇️ कुछ दवाएं लेना (उदाहरण के लिए गर्भनिरोधक इंजेक्शन लेना)
❇️ मादक पदार्थों का सेवन करना। ❇️ स्तनपान कराना।
❇️ स्थाई (क्रॉनिक) बीमारियां होना, हार्मोन सम्बन्धी विकार होना (उदाहरण के लिए पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, थायराइड बीमारी आदि)
❇️ ऐसी स्थितियां, जो डिम्ब ग्रंथि के कार्य को प्रभावित करती हैं
• गर्भाशय के अंदरुनी हिस्सो में विकार, पौलिप्स, सरविक्स अथवा योनि के संक्रमण, अथवा योनि के कैंसर आदि की वजह से दो माहवारियों के बीच में योनि से रक्त-श्राव हो सकता है। इसकी वजह से ‘अनियमित महावारी’ आने का भ्रम हो सकता है

❇️ खान-पान सम्बन्धी विकार होना।
❇️ बहुत अधिक कसरत करना व तनाव होना। ❇️ कुछ दवाएं लेना (उदाहरण के लिए गर्भनिरोधक इंजेक्शन लेना)
❇️ मादक पदार्थों का सेवन करना। ❇️ स्तनपान कराना।
❇️ स्थाई (क्रॉनिक) बीमारियां होना, हार्मोन सम्बन्धी विकार होना (उदाहरण के लिए पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, थायराइड बीमारी आदि)
❇️ ऐसी स्थितियां, जो डिम्ब ग्रंथि के कार्य को प्रभावित करती हैं
• गर्भाशय के अंदरुनी हिस्सो में विकार, पौलिप्स, सरविक्स अथवा योनि के संक्रमण, अथवा योनि के कैंसर आदि की वजह से दो माहवारियों के बीच में योनि से रक्त-श्राव हो सकता है। इसकी वजह से ‘अनियमित महावारी’ आने का भ्रम हो सकता है

क्या मुझे बहुत अधिक माहवारी हो रही है?

• भारी माहवारी से तात्पर्य है, मासिक रक्त श्राव बहुत अधिक होना अथवा इसकी अवधि अधिक होना। आपका रक्त श्राव बहुत अधिक हो सकता है, यदि-
❇️ आपकी माहवारी 7 दिन से अधिक चलती है ( अधिकतर महिलाओं की माहवारी 2-7 दिन तक चलती है )

 

❇️ आपको पैड्स प्रत्येक 1-2 घंटे में बदलने पड़ते हों।
❇️ खून के बड़े-बड़े थक्के निकल रहे हों।
❇️ आपको अचानक बहुत अधिक रक्त श्राव होता है (अर्थात् इतना अधिक रक्त श्राव होना, जिससे आपके कपड़े गीले हो जाएं )
❇️ आपको रात में बार-बार पैड्स बदलने के लिए उठना पड़ता हो।
❇️ अधिक माहवारी की वजह से आपके काम, पारिवारिक जीवन और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा हो।
❇️ माहवारी के दौरान और बाद में आपको चक्कर आते हों, आपकी सांस फूलती हो और थकान महसूस होती हो।

“कल्प श्री सुधा” महिलाओं के लिये एक सम्पूर्ण टाॅनिक

कल्प श्री सुधा महिलाओं के लिए, विशेषकर कई बिमारियों गैस, गर्भाशय की सूजन, माहवारी का अनियमित होना, अत्यधिक रक्तश्राव आदि का इलाज करने के लिए एक पूर्ण आयुर्वेदिक टाॅनिक है। यह रक्त शुद्ध करता है मासिक धर्म सम्बन्धी विकारों में हार्मोनल असंतुलन को नियमित करता है। यह महिलाओं में होने वाले अन्य विकार जैसे शरीर का गिरा-गिरा रहना, अन्दर से बुखार महसूस करना, स्वभाव में चिडचिडापन आदि के लिए बहुत अच्छा टाॅनिक है। आप इसका सेवन नियमित भी कर सकती हैं। यह एक पूर्णतः जडी़-बूटियांे से बनी औषधि है जिसका कोई साईड इफैक्ट नहीं है।

कल्प श्री सुधा यह आपको निम्न प्रकार से लाभ पहुंचाता है –

1- हार्माेन असंतुलन को ठीक करना: कुदरत ने महिलाओं को ऐसा बनाया है कि उन्हें हर माह हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ता है। ये बदलाव मासिक चक्र के कारण होता है। जो उन्हें तनाव, मुहासे, अनचाहे बालों में वृद्धि, अनिद्रा, पाचन, मोटापा व कम कामेच्छा आदि समस्याओ का सामना करवाता है। इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीके से कल्प श्री सुधा समाप्त करती है।
2- पाचन सम्बन्धी समस्याएँ:- कल्प श्री सुधा महिलाओं में अपच, गैस, अफारा इत्यादि में अत्यन्त लाभदायक है। यह पाचन क्रिया को ठीक कर पेट को मुलायम रखता है। इसमें पड़ी जड़ी बूटियाँ आँतो के विकारों में विशेष लाभदायक है।
3- उचित वजन:- कल्प श्री सुधा में पडी औषधियाँ शारीरिक उपापचय को सही कर आपकी पाचन क्रिया को दुरूस्त रखती हैं। सही पाचन क्रिया आपकी भूख बढाती है तथा वजन संतुलित रखती है, जिससे आपके चेहरे का तेज बना रहता है।
4- उत्सर्जन तंत्र:- अक्सर महिलाओं में पेशाब का पीलापन, जलन व लग कर आने जैसी समस्याओं का होना आम बात है। कल्प श्री सुधा में पड़ी औषधियाँ इन समस्याओं से निजात दिलाती है।
5- मासिक धर्म को नियमित करना:- कल्प श्री सुधा मासिक धर्म की अनियमित अवधि को नियमित करती है। अत्यधिक रक्त श्राव को नियंत्रित करती है तथा अधिक रक्त श्राव से होने वाली शारीरिक दुर्बलता को रोकती है। इसके सेवन से अनिमिया (रक्त अल्पता) जैसी बिमारी को रोका जा सकता है।
6- रजोेनिवृत्ति सिंड्रोम (Menopause Syndrome) में आराम देती है।
कल्प श्री सुधा का नियमित सेवन उन महिलाओं को आराम देता है जिनकी आयु रजोनिवृत्ति तक पहुंच चुकी है। इस अवस्था में अपका शरीर कम मात्रा में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बनाता है तथा प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है। इससे शरीर में दर्द, पीठ दर्द तथा अन्य कई समस्याएँ पैदा हो जाती है। कल्प श्री सुधा का सेवन आपको इन समस्याओं में आराम देता है।
7- मासिक धर्म के दौरान परेशानियाँः आपको मासिक धर्म के दौरान कठिन समय से गुजरना पड़ता है तथा दर्द होता है। कई बार दर्द असहनिय हो जाता है। कल्प श्री सुधा की नियमित खुराक ने केवल दर्द में राहत देती है। अपितु आने वाले समय में दर्द सहन करने के लिए, शरीर को मजबूत बनाता है।
कल्प श्री सुधा की खुराक दिन दो बार 5-5 ग्राम सुबह व शाम को लें। बेहतर परिणाम के लिए दूध के साथ सेवन करें। यदि आपका वजन ज्यादा है तो सेवन जल के साथ करें।

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